स्वतंत्रता भारत की
गाँधी का चरखा घूमता है .
लन्दन का तख़्त दहलता है.
गोरा काला बन जाता है.
काला गोरा बन जाता है.
दिल का भगवान बदलता है.
हुक्म का मिजाज बदलता है.
स्याही का रंग बदलता है.
कलामों का राग बदलता है.
तब किसी का मौन बदलता है.
क्योंकि गाँधी का चरखा चलता है.
मजलूमों का ख्याल बदलता है.
जुल्मी का अंदाज़ बदलता है.
दुश्मन का प्यार बदलता है.
इकरार - ए- तकरार बदलता है.
दर्पण का सच बदलता है.
हमजोली का ईमान बदलता है.
मुसाफिर अपनी राह बदलता है.
हमदर्दी का पड़ाव बदलता है.
फिर तो भारत का भाग्य बदलता है.
गाँधी का चरखा घूमता है.
शांति- प्रेम-अहिंसा का मंत्र निकलता है.
पर माँ के आँसू का सबब बदलता है.
क्योंकि अपनों का अरमान बदलता है.
शासन का दिमाग बदलता है.
बन्धु का हित बदलता है.
फिर तो हिमाचल का हिय बदलता है.
प्राचीर पर रंगों का आकार बदलता है.
थामने वाले हाथों का व्यापर औ' आकार बदलता है.
फिर तो गाँधी का चरखा भी बदल जाता है.
स्वदेशी के बदले इम्पोर्टेड लेबल आता है.
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