Saturday, 4 September 2010

कुछ रह गया

कुछ रह गया
दुनिया बदल गयी, इंसान बदल गया,
पर हाय, नाड़ी में बहता लहू वही क्यों रह गया?
माली बदल गया, फूल बदल गया,
पर हाय, पेड़ों पर फलता कहानी वही क्यों रह गया?
नाम बदल गया, पहचान बदल गया,
पर हाय, दिलों-दिमाग पर सोता मेहमान वही क्यों रह गया?
मंदिर बदल गया, पुजारी बदल गया,
पर हाय, मंदिर में बैठा भगवान वही क्यों रह गया?

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