गाड़ी पास आयी | उस पर बैठे इंस्पेक्टर ने कहा - क्या तुम्हे मालूम नहीं है कि कर्फ्यू लगा हुआ है |
-- "जी- जी नहीं| मैं बाहर से आ रहा हूँ | अभी तुरत गाड़ी से उतरा हूँ |" इंस्पेक्टर ने टिकट देखा | फिर कहा - आप गाड़ी में बैठ जाइये | हम आपको घर तक छोड़ देते हैं | रहीम गाड़ी में बैठ गया | पुलिस की गाड़ी ने उसे घर के पास वाले चौक तक छोड़ दिया | और इंस्पेक्टर ने कहा - " ज़रा ध्यान से जाइएगा | जब गली के नुक्कड़ पर पहुंचा तो अपने घर के दरवाजे पर चार- पञ्च लोगों को देखकर उसका माथा ठनका | उसका घर गली के अंतिम सिरे पर दाहिनी ओर था | उस गली में मात्र एक मकान और था | वह मकान भी दाहिनी ओर ही था | बाएं ओर के प्लॉट खाली थे | वे जंगली झाड़ों आदि से भरे थे |
रहीम को एकाएक प्रकट हुआ देखकर एक बरगी तो सभी सहम गए | फिर पास ही रहने वाले एक मौलवी साहब ने उसके कंधे पर हाथ रखकर कहा था - " हौसला रखो बरखुरदार " सुनते ही रहीम के होश उड़ गए | उसके हाथ से सूटकेस छुट गया | वह अन्दर दौड़ा | अन्दर पहुँचते ही उसका खून सर्द हो गया | बाहर वाले कमरे में उसके अब्बा-अम्मी और एक मात्र बहन की रक्त रंजित लाश पडी थी | वह लाशों को एकटक देखता खड़ा रह गया | उसकी जबान हलक से चिपक गयी | सिन्हा साहब कह रहे थे - " धीरज रखो बेटे | हम बदनसीबों के साथ ही ऐसा होता है | कल रात ही कुछ उपद्रवी आए थे | खूब हो - हल्ला हुआ था | दर के मारे मोहल्ले का कोई व्यक्ति घर से बाहर नहीं निकला | कल रात से तेल्चार साहब भी गायब हैं | उनका घर भी खुला पडा है| घर के सभी लोग पहले से ही उनके सास के मरने के कारण मातमपुर्सी के लिए गए हुए हैं |"
दरअसल यह मोहल्ला सीमा रेखा पर था | एक तरफ तो मुसलमानी आबादी की बस्ती थी तो दूसरी ओर हिन्दुओं की | जो कल हुआ था , वही परसों भी हुआ था और उपद्रवी लोगों ने सिन्हा साहब के घर के सभी लोगों को मार डाला था | उनके घर में सिर्फ उनका कुत्ता और वे बचे थे | वे उस समय घर पर नहीं थे |
सभी रहीम को दिलासा दे रहे थे | लगता था उपद्रवियों ने उसकी बहन के साथ दुर्व्यवहार करने की कोशिश की थी | उसके शरीर पर कपड़े कई जगह से फटे हुए थे और सीने से खून का बेतहाशा रिसाव हुआ था | कमरे का फर्श जमे हुए खून से बिलकुल लालिमा लिए काला हो रहा था | रहीम के आते ही जब लोग अन्दर आने लगे तो सिन्हा साहब ने घर में चादरें ढूंढ़कर तीनों लाशों के शरीर को ढक दिया | थोड़ी देर बाद ही पुलिस की जीप, सेना के जवानों से भरा एक वैन, एस पी की गाड़ी धायँ धायँ करते पहुँच गए | आते ही वे लोग पूछने लगे कब हुआ? कैसे हुआ? पुलिस को इत्तिला क्यों नहीं की ? आदि आदि |
Saturday, 13 November 2010
ज्ञान
ज्ञान भाग - १
माधोपुर में दंगा हो गया है | यह सुनते ही वह जेहनी तौर पर बेहद परेशान हो गया था | वह माधोपुर का ही रहने वाला था | यहाँ वह एक प्रतियोगिता परीक्षा देने आया था | कुछ किताबें खरीद करनी थीं, सो एक दिन के लिए रुक गया था| बाज़ार में यह अफवाह सुनते ही तुरंत होटल वापस आया और उसने अपने कपड़े, सामान आदि सूटकेस में समेटे और स्टेशन की ओर चल पड़ा | वह जल्द से जल्द घर पहुँच जाना चाहता था| जब उसने माधोपुर का टिकट माँगा तो काउंटर क्लर्क को हैरानी हुई थी और उसने उससे दो बार पूछा था कि कहाँ का टिकट लेना है? कतार में उससे पीछे खड़ा व्यक्ति भी हैरान हो गया था | शायद इसलिए कि माधोपुर जाने वाले तो केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल, सेना आदि के जवान की हो रहे थे और वह दंगा के बाद किसी पहले व्यक्ति को माधोपुर जाते देख रहा था| वहाँ से भागकर आनेवालों की ही तादाद ही ज्यादा थी| खुदरा पैसे देने में उसे कुछ देर हो गयी और तब तक में पीछे वाले व्यक्ति ने टिकट खरीद लिया और जब वह प्लेटफॉर्म की ओर चला तो वह व्यक्ति भी साथ-साथ ही चल पड़ा| उसे भी वही गाड़ी पकड़नी थी, पर उसे माधोपुर से काफी पहले ही उतरना था|
साथ चलते-चलते ही उसने पूछा था " माधोपुर में कोई रहता है क्या आपका?" उसने उस व्यक्ति की ओर देखा और जवाब दिया " हाँ हमारा घर वहीँ है| मेरे अब्बा और अम्मी और सारा परिवार वहीँ रहता है|" उस व्यक्ति के मुँह से निकला - ओऊ |"
फिर उसने सिगरेट सुलगाई और एक काश लेने के बाद पूछा - "क्या नाम है आपका?" उसने उसके चेहरे की ओर नजरें जमाते हुए कहा - " जी, रहीम.... मोहम्मद रहीम |" उस व्यक्ति ने जवाब में सिर्फ हाँ की तरह सर हिलाया और सिगरेट पीने लगा | प्लेटफॉर्म पर पहुँच कर दोनों सीमेंट के बने कुर्सीनुमा चबूतरों पर बैठकर गाड़ी का इंतज़ार करने लगे | पर परेशान होने के कारण रहीम बार-बार उठकर धीरे-धीरे कुछ कदम चलकर जाता और फिर लौटकर आकर बैठ जाता | जब यह क्रम कई बार चला तो जब वह एक बार लौटकर आया तो उस व्यक्ति ने मुस्कुराते हुए कहा - " परेशान न होईए, सब ठीक ही होगा|" जवाब में रहीम ने सर हिलाया और मुस्कुराने की कोशिश में परेशानी के भाव के साथ अधर गोल हो गए | फिर रहीम ने एक पत्रिका खरीदी और उसे पढने लगा, पर ज्यादा नहीं पढ़ पाया और उसने पत्रिका बंद कर दी | गाड़ी जब माधोपुर पहुँची तो हमेशा की तरह आकाश में पूर्व में हल्की लालिमा छा चुकी थी| पर अभी अन्धेरा ही था| स्टेशन पर कोई सवारी न थी| इक्के दुक्के लोग ही गाड़ी से उतरे थे| वह पैदल ही घर की ओर बढ़ा | अभी चौक तक ही पहुंचा था कि पुलिस की गाड़ी ने उसे रोक लिया | दूर से ही पुलिस की जीप से आवाज आयी - "कहाँ जा रहे हो?" - "जी घर |"
माधोपुर में दंगा हो गया है | यह सुनते ही वह जेहनी तौर पर बेहद परेशान हो गया था | वह माधोपुर का ही रहने वाला था | यहाँ वह एक प्रतियोगिता परीक्षा देने आया था | कुछ किताबें खरीद करनी थीं, सो एक दिन के लिए रुक गया था| बाज़ार में यह अफवाह सुनते ही तुरंत होटल वापस आया और उसने अपने कपड़े, सामान आदि सूटकेस में समेटे और स्टेशन की ओर चल पड़ा | वह जल्द से जल्द घर पहुँच जाना चाहता था| जब उसने माधोपुर का टिकट माँगा तो काउंटर क्लर्क को हैरानी हुई थी और उसने उससे दो बार पूछा था कि कहाँ का टिकट लेना है? कतार में उससे पीछे खड़ा व्यक्ति भी हैरान हो गया था | शायद इसलिए कि माधोपुर जाने वाले तो केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल, सेना आदि के जवान की हो रहे थे और वह दंगा के बाद किसी पहले व्यक्ति को माधोपुर जाते देख रहा था| वहाँ से भागकर आनेवालों की ही तादाद ही ज्यादा थी| खुदरा पैसे देने में उसे कुछ देर हो गयी और तब तक में पीछे वाले व्यक्ति ने टिकट खरीद लिया और जब वह प्लेटफॉर्म की ओर चला तो वह व्यक्ति भी साथ-साथ ही चल पड़ा| उसे भी वही गाड़ी पकड़नी थी, पर उसे माधोपुर से काफी पहले ही उतरना था|
साथ चलते-चलते ही उसने पूछा था " माधोपुर में कोई रहता है क्या आपका?" उसने उस व्यक्ति की ओर देखा और जवाब दिया " हाँ हमारा घर वहीँ है| मेरे अब्बा और अम्मी और सारा परिवार वहीँ रहता है|" उस व्यक्ति के मुँह से निकला - ओऊ |"
फिर उसने सिगरेट सुलगाई और एक काश लेने के बाद पूछा - "क्या नाम है आपका?" उसने उसके चेहरे की ओर नजरें जमाते हुए कहा - " जी, रहीम.... मोहम्मद रहीम |" उस व्यक्ति ने जवाब में सिर्फ हाँ की तरह सर हिलाया और सिगरेट पीने लगा | प्लेटफॉर्म पर पहुँच कर दोनों सीमेंट के बने कुर्सीनुमा चबूतरों पर बैठकर गाड़ी का इंतज़ार करने लगे | पर परेशान होने के कारण रहीम बार-बार उठकर धीरे-धीरे कुछ कदम चलकर जाता और फिर लौटकर आकर बैठ जाता | जब यह क्रम कई बार चला तो जब वह एक बार लौटकर आया तो उस व्यक्ति ने मुस्कुराते हुए कहा - " परेशान न होईए, सब ठीक ही होगा|" जवाब में रहीम ने सर हिलाया और मुस्कुराने की कोशिश में परेशानी के भाव के साथ अधर गोल हो गए | फिर रहीम ने एक पत्रिका खरीदी और उसे पढने लगा, पर ज्यादा नहीं पढ़ पाया और उसने पत्रिका बंद कर दी | गाड़ी जब माधोपुर पहुँची तो हमेशा की तरह आकाश में पूर्व में हल्की लालिमा छा चुकी थी| पर अभी अन्धेरा ही था| स्टेशन पर कोई सवारी न थी| इक्के दुक्के लोग ही गाड़ी से उतरे थे| वह पैदल ही घर की ओर बढ़ा | अभी चौक तक ही पहुंचा था कि पुलिस की गाड़ी ने उसे रोक लिया | दूर से ही पुलिस की जीप से आवाज आयी - "कहाँ जा रहे हो?" - "जी घर |"
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