Saturday, 13 November 2010

ज्ञान भाग २

गाड़ी पास आयी | उस पर बैठे इंस्पेक्टर ने कहा - क्या तुम्हे मालूम नहीं  है कि कर्फ्यू  लगा हुआ है |
-- "जी- जी नहीं| मैं बाहर से आ रहा हूँ | अभी तुरत गाड़ी से उतरा हूँ |" इंस्पेक्टर ने टिकट देखा | फिर कहा - आप गाड़ी में बैठ जाइये | हम आपको घर तक छोड़ देते हैं | रहीम गाड़ी में बैठ गया | पुलिस की गाड़ी ने उसे घर के पास वाले चौक  तक छोड़ दिया | और इंस्पेक्टर ने कहा - " ज़रा ध्यान से जाइएगा | जब गली के नुक्कड़ पर पहुंचा तो अपने घर के दरवाजे पर चार- पञ्च लोगों को देखकर उसका माथा ठनका | उसका घर गली के अंतिम सिरे पर दाहिनी ओर था | उस गली में मात्र एक मकान और था | वह मकान भी दाहिनी ओर ही था | बाएं ओर के प्लॉट खाली थे | वे जंगली झाड़ों आदि से भरे थे |
रहीम को एकाएक प्रकट हुआ देखकर एक बरगी तो सभी सहम गए | फिर पास ही रहने वाले एक मौलवी साहब ने उसके कंधे पर हाथ रखकर कहा था - " हौसला रखो बरखुरदार " सुनते ही रहीम के होश उड़ गए | उसके हाथ से सूटकेस छुट गया | वह अन्दर दौड़ा | अन्दर पहुँचते ही उसका खून सर्द हो गया | बाहर वाले कमरे में उसके अब्बा-अम्मी और एक मात्र बहन की रक्त रंजित लाश पडी थी | वह लाशों को एकटक देखता खड़ा रह गया | उसकी जबान हलक से चिपक गयी | सिन्हा साहब कह रहे थे - " धीरज रखो बेटे | हम बदनसीबों के साथ ही ऐसा होता है | कल रात ही कुछ उपद्रवी आए थे | खूब हो - हल्ला हुआ था | दर के मारे मोहल्ले का कोई व्यक्ति घर से बाहर नहीं निकला | कल रात से तेल्चार साहब भी गायब हैं | उनका घर भी खुला पडा है| घर के सभी लोग पहले से ही उनके सास के मरने के कारण मातमपुर्सी के लिए गए हुए हैं |"
दरअसल यह मोहल्ला सीमा रेखा पर था | एक तरफ तो मुसलमानी आबादी की बस्ती थी तो दूसरी ओर हिन्दुओं की | जो कल हुआ था , वही परसों भी हुआ था और उपद्रवी लोगों ने सिन्हा साहब के घर के सभी लोगों को मार डाला था | उनके घर में सिर्फ उनका कुत्ता और वे बचे थे | वे उस समय घर पर नहीं थे |
सभी रहीम को दिलासा दे रहे थे | लगता था उपद्रवियों ने उसकी बहन के साथ दुर्व्यवहार करने की कोशिश की थी | उसके शरीर पर कपड़े कई जगह से फटे हुए थे  और सीने से खून का बेतहाशा रिसाव हुआ था | कमरे का फर्श जमे हुए खून से बिलकुल लालिमा लिए काला हो रहा था | रहीम के आते ही जब लोग अन्दर आने लगे तो सिन्हा साहब ने घर में चादरें ढूंढ़कर तीनों लाशों के शरीर को ढक दिया  | थोड़ी देर बाद ही पुलिस की जीप, सेना के जवानों से भरा एक वैन, एस पी  की  गाड़ी  धायँ धायँ करते पहुँच गए | आते ही वे लोग पूछने लगे कब हुआ? कैसे हुआ? पुलिस को इत्तिला क्यों नहीं की ? आदि आदि |

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