Saturday, 13 November 2010

ज्ञान

ज्ञान भाग - १
माधोपुर में दंगा हो गया है | यह सुनते ही वह जेहनी तौर पर बेहद परेशान हो गया था | वह माधोपुर का ही रहने वाला था | यहाँ वह एक प्रतियोगिता परीक्षा देने आया था | कुछ किताबें खरीद करनी  थीं, सो एक दिन के लिए रुक गया था| बाज़ार में यह अफवाह सुनते ही तुरंत  होटल वापस आया और उसने अपने कपड़े, सामान आदि सूटकेस में समेटे और स्टेशन की ओर चल पड़ा | वह जल्द से जल्द घर पहुँच  जाना चाहता था| जब उसने माधोपुर का टिकट माँगा तो काउंटर क्लर्क को हैरानी हुई थी और उसने उससे दो बार पूछा  था कि  कहाँ का टिकट लेना  है? कतार में उससे पीछे खड़ा व्यक्ति भी हैरान हो गया था | शायद इसलिए कि माधोपुर जाने वाले तो केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल, सेना आदि के जवान की हो रहे थे और वह दंगा के बाद किसी पहले व्यक्ति को माधोपुर जाते देख रहा था| वहाँ से भागकर आनेवालों की ही तादाद ही ज्यादा थी| खुदरा पैसे देने में उसे कुछ देर हो गयी और तब तक में पीछे वाले व्यक्ति ने टिकट खरीद लिया और जब वह प्लेटफॉर्म की ओर चला तो वह व्यक्ति भी साथ-साथ ही चल पड़ा| उसे भी वही गाड़ी पकड़नी थी, पर उसे माधोपुर से काफी पहले ही उतरना था|
साथ चलते-चलते ही उसने पूछा था " माधोपुर में कोई रहता है क्या आपका?" उसने उस व्यक्ति की ओर देखा और जवाब दिया " हाँ  हमारा घर वहीँ है| मेरे अब्बा और अम्मी और सारा परिवार वहीँ रहता है|" उस व्यक्ति के मुँह से निकला - ओऊ |"
फिर उसने सिगरेट सुलगाई और एक काश लेने के बाद पूछा - "क्या नाम है आपका?" उसने उसके चेहरे की ओर नजरें जमाते हुए कहा - " जी, रहीम.... मोहम्मद रहीम |" उस व्यक्ति ने जवाब में सिर्फ हाँ की तरह सर हिलाया और सिगरेट पीने लगा | प्लेटफॉर्म पर पहुँच कर दोनों सीमेंट के बने कुर्सीनुमा चबूतरों पर बैठकर गाड़ी का इंतज़ार करने लगे | पर परेशान होने के कारण रहीम बार-बार उठकर धीरे-धीरे कुछ कदम चलकर जाता और फिर लौटकर आकर बैठ जाता | जब यह क्रम कई बार चला तो जब वह एक बार लौटकर आया तो उस व्यक्ति ने मुस्कुराते  हुए कहा - " परेशान न होईए, सब ठीक ही होगा|" जवाब में रहीम ने सर हिलाया और मुस्कुराने  की कोशिश में परेशानी के भाव के साथ अधर गोल हो गए | फिर रहीम ने एक पत्रिका खरीदी और उसे पढने लगा, पर ज्यादा नहीं पढ़ पाया और उसने पत्रिका बंद कर दी | गाड़ी जब माधोपुर पहुँची तो हमेशा की तरह आकाश में पूर्व में हल्की लालिमा छा चुकी थी|  पर अभी अन्धेरा ही था| स्टेशन पर कोई सवारी न थी| इक्के दुक्के लोग ही गाड़ी से उतरे थे| वह पैदल ही घर की ओर बढ़ा | अभी चौक तक ही पहुंचा था कि पुलिस की गाड़ी ने उसे रोक लिया | दूर से ही पुलिस की जीप से आवाज आयी - "कहाँ जा रहे हो?" - "जी घर |"

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